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Friday, April 20, 2012

Who is Dhamdhani?

Who is Dhamdhani?
Who is in Paramdham?

चलो चलो रे साथजी, आपन जैए धाम।
मूल वतन धनिएं बताया, जित ब्रह्म सृष्टि स्यामाजी स्याम ।।१

हे सुन्दरसाथजी ! चलो, हम सब साथ मिलकर परमधाम जाएँ. परमधामकी बात सद्गुरुने हमें बताई है, जहाँ ब्रह्मसृष्टि और श्यामाजी सहित श्री श्याम (अक्षरातीत श्रीकृष्णजी) विराजमान हैं.

O Sundarsath, lets all go to the Paramdham. The original abode our Lord has shown where dwells the celestial souls (brahmshristhi),Shyamaji and Shyam.
The mool means original that our Lords has shown where resides Shyam,Shyama and celestial souls only. This is very clear statement about Paramdham and the Lord.
प्रकरण ८९ Kirantan

घर श्री धाम अने श्रीक्रस्न, ए फल सार तणो तारतम।
तारतमे अजवालुं अति थाए, आसंका नव रहे मन मांहे।।२३

हमारा घर अखण्ड परमधाम तथा हमारे धनी श्रीकृष्ण यही तारतमका सार फल है. इस तारतम ज्ञाान द्वारा अत्यन्त प्रकाश फैलता है. जिससे मनमें किसी भी प्रकारकी शंका नहीं रहती है.
Our abode is Paramdham(akhand aksharateet) and Shree Krishna, this the fruit of Tartam sagar(dispeller of the ignorance brought by Shree Devachandraji). The light of this will be so great that all the confusion from mind will be removed.

सोई चाल गत अपनी, जो करते माहें धाम।
हंसना खेलना बोलना, संग स्यामाजी स्याम।।११

हम परमधाममें जिस प्रकार चलते थे तथा श्याम-श्यामाजीके साथ हँसते, खेलते व बोलते थे, उन प्रसङ्गोंको याद करो.
How was our actions and how we behaved in Paramdham. How we laughed, played and talked along with Shyamaji and SHYAM!
This is the description of Paramdham and this is the last instruction to us by Mahamati Prannath.

प्रकरण ९३ kirantan
रास मांहें रमाडयां जेणे, प्रगट लीला कीधी तेणे।
श्री धामतणां धणी कहेवाए, ते आवी बेठा आपण मांहें।।५

जिस स्वरूपने वृन्दावनमें अखण्ड रासकी लीला खेलाई उन्होंने ही यहाँ (नवतनपुरीमें) आकर उस लीलाको प्रकट किया. वे ही परमधामके धनी कहलाते हैं. वे ही अभी हम सबके बीच आकर बैठे हैं.
The beloved Lord who sported Raas with us in Vrindavan, the same appeared and revealed us the sport(The raas played in the yogmaya brahmand), He is called the Lord of the paramdham who came and resided within us.

प्रकरण २९ prakash gujarati

याके प्रेम सेज्या सिनगार, जाको वार न पाइए पार ।
प्रेम अरस परस स्यामा स्याम, सैयां वतन धनी धाम ।।३९

इनकी शय्या तथा शृङ्गार भी प्रेममय है, इनकी शोभाका कोई पारावार ही नहीं है. ये सभी श्यामाश्यामके प्रेमसे ओत-प्रोत हैं तथा इनका घर भी धामधनीका परमधाम ही है.

प्रेम पियाजीके आउध, प्रेम स्यामाजी के अंग सुध ।
ब्रह्म सृष्टि की एही विध, ए दूजे काहूं ना दिध ।।४०

अपने प्रियतम धनीको प्राप्त करनेका शस्त्र भी प्रेम ही है, इतना ही नहीं श्रीश्यामाजीके स्वरूपकी सुधि भी प्रेमसे ही होती है. ब्रह्मसृष्टिको ही यह प्रेम प्राप्त हुआ है, उनके अतिरिक्त अन्य किसीको भी यह प्राप्त नहीं हुआ है.
1 prakaran shri parikrama

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